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Bumblebee movie review – सर्वश्रेष्ठ ट्रांसफॉर्मर फिल्म है ‘बम्बलबी’


‘बम्बलबी’ को ट्रांसफॉर्मर सिरीज की सर्वश्रेष्ठ फिल्म कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

फिल्म की शुरुआत ट्रांसफॉर्मर्स के ग्रह साइबरट्रॉन में होने वाले कुछ घटनाक्रमों से होती है, जहां इनसानों के दोस्त ट्रांसफॉर्मर ऑटोबॉट्स, इनसानों के दुश्मन ट्रांसफॉर्मर्स डिसेप्टिकॉन्स से युद्ध के दौरान हारने की कगार पर हैं। ऑटोबॉट्स का नेता ऑप्टिमस प्राइम अपने प्रमुख ट्रांसफॉर्मर बी-127 को धरती पर जाने का हुक्म देता है, ताकि वे वहां भविष्य में युद्ध के लिए एक अस्थायी बेस बना सकें। बी-127 ऐसा ही करता है, पर धरती पर उसकी ब्लिट्जविंग नामक डिसेप्टिकॉन से भिडं़त हो जाती है। ब्लिट्जविंग, बी-127 के वॉइस बॉक्स और उसकी याद्दाश्त को नष्ट कर देता है, पर जख्मी होते हुए भी बी-127, ब्लिट्जविंग को खत्म कर देता है। अंत में वह वहीं खड़ी एक वोक्सवैगन बीटल कार का रूप ले लेता है।

यह कहानी 1987 के दौर में गढ़ी गई है। ट्रांसफॉर्मस की इन गतिविधियों के बाद हम मिलते हैं 17 वर्षीय लड़की चार्ली से। चार्ली हॉट डॉग बेचने और गैराज में गाड़ियां बनाने जैसे काम करती है। अपने पिता को खो चुकी चार्ली की मां ने दूसरी शादी कर ली है। हमेशा अकेलापन महसूस करने वाली चार्ली जिस गैराज में काम करती है, वहां एक दिन उसकी नजर पुरानी खटारा वोक्सवैगन बीटल कार पर पड़ती है और वह अपने जन्मदिन के दिन गैराज मालिक से उस कार की फरमाहिश कर बैठती है। यह वही कार है, जिसका रूप बी-127 ट्रांसफॉर्मर ने लिया था। दिलदार मालिक उसकी यह फरमाहिश मान लेता है। चार्ली कार को अपने घरेलू गैराज में ले आती है। एक रोज वह उसके कलपुर्जे खोलकर उसे ठीक ही कर रही होती है कि कार रूप बदलकर ट्रांसफॉर्मर (बी-127) के वेश में आ जाती है। चार्ली इस बदलाव से घबरा जाती है, पर जब वह देखती है कि ट्रांसफॉर्मर खुद ही उससे डरा हुआ है और छुपने के चक्कर में है, तो वह कुछ सहज होती है। धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती हो जाती है। यह दोस्ती क्या रंग लाती है, डिसेप्टिकॉन्स के मंसूबों का क्या होता है? बम्बलबी की याददाश्त वापस आती है या नहीं, इन सभी सवालों का जवाब फिल्म देखकर ही पाना बेहतर होगा।

फिल्म में चार्ली बनी हैली स्टेनफील्ड ने गजब का अभिनय किया है। एक अकेली, अनाथ टीनेजर लड़की के किरदार में वह रचबस गई हैं। बम्बलबी के साथ उनकी केमिस्ट्री गजब की लगी है। एक दृश्य में वह बम्बलबी को प्रशिक्षण दे रही होती हैं कि अगर वह ‘कोडवर्ड’ के रूप में ऐसा कहें कि ‘कोई आ गया, छुप जाओ’… तो ऐसा करना है… इतना कहकर वह एक बड़े से रेत के ढेर के पीछे छुप जाती हैं। उनकी देखादेखी बम्बलबी एक छोटा सा रेत का ढेर बनाता है और उसके पीछे झुककर बैठ जाता है, बिना यह समझे कि उसके शरीर के आकार के सामने वो मुट्ठी भर रेत का ढेर कुछ नहीं है। फिल्म में इस तरह के कई दृश्य हैं जिन पर हंसी भी आती है और बम्बल की भोली सूरत पर लाड़ भी आता है। इसके लिए तारीफ होनी चाहिए स्क्रीनप्ले लेखिका क्रिस्टीना हॉडसन और निर्देशक ट्रैविस नाइट की। बम्बलबी के किरदार की सबसे बड़ी दिलचस्पी जुड़ी है उस लाचारी और मासूमियत में, जो हर वक्त उसके मशीनी चेहरे पर पसरी रहती है। एक मशीनी किरदार को इतना जीवंत दिखाना कतई आसान नहीं था और यह संभव हुआ है, जिसके लिए फिल्म के निर्माण से जुड़ा हर व्यक्ति तारीफ का पात्र है।

जॉन सीना भी फिल्म में एक खास किरदार में हैं (जैक बन्र्स नामक सेना अधिकारी) जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है। साथ ही जॉर्ज लैंडबर्ग जूनियर फिल्म में चार्ली के दोस्त मेमो के किरदार में हैं, जिसमें वह जमे हैं। फिल्म का पाश्र्व संगीत भी इसके अनुरूप है। स्पेशल इफेक्ट्स तो दमदार हैं ही। यह फिल्म बच्चों, बड़ों- सभी को पसंद आएगी।

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